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| Karwaan |
बदला लेना तो बनता है बॉस: ब्लैकमेल
बॉडी एक्सचेंज करने के लिए अविनाश और शौकत सफर पर निकल जाते हैं। इसी बीच ताहिरा अविनाश को फोन करती है कि उसकी बेटी तान्या तब से फोन नहीं उठा रही है, जबसे उसे नानी की मौत का पता चला है। अविनाश और शौकत तान्या को लेने ऊटी के लिए निकल जाते है। इस तरह से उनका सफर लंबा हो चला जाता है। आखिर में अविनाश को अपने पिता की बॉडी के साथ मिले सामान में खत मिलता है, जिससे उसे पता चलता है कि उसके पिता उसे क्यों फोटोग्राफी नहीं करने देते। वह खत अविनाश के पिता अपने दोस्त के लिए लिखते हैं, जिसमें वह कहते हैं कि अविनाश और मेरी बातचीत नहीं है क्योंकि मैंने उसे फोटोग्राफी नहीं करने दी। जब मैं यंग था तब मेरा भी मन था कि पियानो सीखूं और संगीत में अपना करियर बनाऊं लेकिन जिंदगी में इतनी गरीबी देखी कि हिम्मत नहीं हो पाई। सोच रहा हूँ कि अविनाश को कह दूँ कि कुछ दिन काम कर लें और जल्दी रिटायरमेंट लेकर फोटोग्राफी शुरू कर दें। यह सब पढ़ कर अविनाश के मन में पिता के लिए नाराजगी दूर हो जाती है।
कुल मिलाकर कहानी अच्छी है। कहानी किसी तरह की आत्म-खोज तो नहीं, लेकिन हाँ सच्चाई के बिलकुल करीब है। फिल्म का निर्देशन भी अच्छा किया गया है। डायलॉग्स भी बेहतर लिखे गए हैं। शुरू-शुरू में 5 से 10 मिनट तक फिल्म बोरिंग लगती है, लेकिन जैसे ही मौत की खबर आती है फिल्म दिलचस्प लगने लगती है, और तो और इरफ़ान खान सोने पे सुहागा।
सिनेमाटोग्राफी ठीक थी लेकिन और बेहतर होने की फिल्म में गुंजाइश थी।
एक्टिंग की बात करें तो इरफान ने इस फिल्म को देखने के लायक बनाया है और कोई शक नहीं उनका किरदार लिखने वाले राइटर (आकर्ष खुराना) ने काफी मेहनत की है। दुलकर सलमान, आकाश खुराना, अमाला अक्किनेनी, मिथिला पलकर ने अच्छा अभिनय किया है।
कुल-मिलाकर ये कि फिल्म देखी जा सकती है।

Very nice
ReplyDeletethank u
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