Sunday, June 7, 2020

मैं अकेला ही चला था, लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया

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Karwaan 
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया। कारवाँ फिल्म अविनाश (दुलकर सलमान) और शौकत (इरफान खान) नाम के दो दोस्तों के सफर की कहानी है। अविनाश फोटोग्राफर बनना चाहता था लेकिन उसके पिताजी नहीं चाहते थे कि वह ज्यादा संघर्ष वाला प्रोफेशन चुनें जिसमें कोई सिक्युरिटी न हो। इस वजह से अविनाश और उसके पिता के सम्बन्ध खराब रहते हैं। एक दिन अविनाश को उसके पिता की मौत की खबर मिलती है। जब वह उनकी बॉडी लेने जाता है तो उसे किसी और की बॉडी दे दी जाती है। उसे पता चलता है कि उसके पिता की बॉडी ताहिरा नाम की महिला के पास चली गई है और ताहिरा की मां की बॉडी अविनाश के पास आ जाती है।


बदला लेना तो बनता है बॉस: ब्लैकमेल


बॉडी एक्सचेंज करने के लिए अविनाश और शौकत सफर पर निकल जाते हैं। इसी बीच ताहिरा अविनाश को फोन करती है कि उसकी बेटी तान्या तब से फोन नहीं उठा रही है, जबसे उसे नानी की मौत का पता चला है। अविनाश और शौकत तान्या को लेने ऊटी के लिए निकल जाते है। इस तरह से उनका सफर लंबा हो चला जाता है। आखिर में अविनाश को अपने पिता की बॉडी के साथ मिले सामान में खत मिलता है, जिससे उसे पता चलता है कि उसके पिता उसे क्यों फोटोग्राफी नहीं करने देते। वह खत अविनाश के पिता अपने दोस्त के लिए लिखते हैं, जिसमें वह कहते हैं कि अविनाश और मेरी बातचीत नहीं है क्योंकि मैंने उसे फोटोग्राफी नहीं करने दी। जब मैं यंग था तब मेरा भी मन था कि पियानो सीखूं और संगीत में अपना करियर बनाऊं लेकिन जिंदगी में इतनी गरीबी देखी कि हिम्मत नहीं हो पाई। सोच रहा हूँ कि अविनाश को कह दूँ कि कुछ दिन काम कर लें और जल्दी रिटायरमेंट लेकर फोटोग्राफी शुरू कर दें। यह सब पढ़ कर अविनाश के मन में पिता के लिए नाराजगी दूर हो जाती है।
कुल मिलाकर कहानी अच्छी है। कहानी किसी तरह की आत्म-खोज तो नहीं, लेकिन हाँ सच्चाई के बिलकुल करीब है। फिल्म का निर्देशन भी अच्छा किया गया है। डायलॉग्स भी बेहतर लिखे गए हैं। शुरू-शुरू में 5 से 10 मिनट तक फिल्म बोरिंग लगती है, लेकिन जैसे ही मौत की खबर आती है फिल्म दिलचस्प लगने लगती है, और तो और इरफ़ान खान सोने पे सुहागा। 
सिनेमाटोग्राफी ठीक थी लेकिन और बेहतर होने की फिल्म में गुंजाइश थी।
एक्टिंग की बात करें तो इरफान ने इस फिल्म को देखने के लायक बनाया है और कोई शक नहीं उनका किरदार लिखने वाले राइटर (आकर्ष खुराना) ने काफी मेहनत की है। दुलकर सलमान, आकाश खुराना, अमाला अक्किनेनी, मिथिला पलकर ने अच्छा अभिनय किया है।
कुल-मिलाकर ये कि फिल्म देखी जा सकती है। 

ऐसे कैसे जाने भी दो यारो!

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