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| Blackmail Filmistan |
रणजीत अपनी पत्नी डॉली के पिता के घर-जमाई बनकर रहता है। वह अपनी बीवी से बिजनेस शुरू करने की बात कह कर रुपए ले लेता है लेकिन डॉली के पिता उन्हें पैसे वापिस देने को कहते हैं। वह परेशान हो कर रीना को ब्लैकमेल करता है और उससे पैसे मांगता है। इस तरह ब्लैकमेलिंग का दौर चलता है और ब्लैकमेलिंग करने वाले 4-5 लोगों का चक्र चलता रहता हैं। इसी दौरान ब्लैकमेलर नंबर 3 मर जाती है और उसकी हत्या का इल्जाम देव पर आता है। अब देव आगे क्या करेगा, दूसरी तरफ उसे ब्लैकमेल करने वाले भी परेशान कर रहे हैं।
ऐसे कैसे जाने भी दो यारो!
फिल्म की कहानी अच्छी है। देव को टॉयलेट पेपर कंपनी में वर्किंग बताया है। जिंदगी और कहानी को पानी और टॉयलेट पेपर से अच्छी तरह जोड़ कर दिखाया हैं। स्क्रीनप्ले राइटर (परवेज शेख) ने अपनी सारी क्रिएटिविटी फिल्म में डाल दी। फिल्म में दिखाया गया देव का घर भी बिलकुल नेचुरल लगता है। अभिनय देव ने ब्लैकमेल का निर्देशन किया हैं और फिल्म में मजा ला दिया। सिर्फ फिल्म के डायलॉग्स और सीन ही नहीं बोलते बल्कि बैकग्राउंड में दिखने वाली चीजें भी बहुत कुछ बोलती हैं।
फिल्म की सिनेमाटोग्राफी भी तारीफें काबिल है। कैमरा का कैसे इस्तेमाल करना है? ये इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है।
संगीत फिल्म के अनुसार है। दिल का खिलौना गाना पत्नी से की गई खामोश मोहब्बत का यकीं दिलाने में मदद करता है। बदला गाना तो पूरी फिल्म में हंसाता है।
फिल्म की एडिटिंग भी ठीक है। बेवजह के सीन फिल्म में नहीं है। अगर अभिनय की बात करें तो इरफ़ान खान ने अच्छी एक्टिंग की हैं। कोई शक नहीं, किरदार में जाने के बाद उनकी आँखें डायलॉग्स बोलती हैं। कीर्ति और दिव्या दत्ता ने भी अच्छा अभिनय किया हैं। गजराज राव ने कम सीन में अच्छा असर दिखाया है। अरुणोदय सिंह यंग एक्टर है, उनमें बहुत संभावनाएं हैं। अनुजा साठे ने प्रभा के किरदार में अच्छा अभिनय किया है।
कुल मिलाकर ये कि फिल्म देखने लायक है लेकिन गलत काम करने को बढ़ावा देती है। हालाँकि ज्यादा सीरियस हो कर न देखी जाए तो फिल्म में कोई कमी नहीं।

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