Friday, March 27, 2020

शुक्राणु: फिजूल में घायल हुए आत्मसम्मान की कहानी

शुक्राणु नाम सुन कर ही लग रहा था कि इस फ़िल्म को देखकर हंसी आएगी। फ़िल्म का ट्रेलर देखकर भी यही उम्मीद की थी लेकिन इन उम्मीदों का सिर्फ राम नाम सत्य ही हुआ। शुक्राणु इंदर (दिव्येंदु शर्मा) के इर्द-गिर्द घूमती है। इमरजेंसी के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों की नसबंदी के आदेश दिए। फ़िल्म में इसे अमानवीय दिखाया गया है, हालाँकि अमानवीय नसबंदी करने का आदेश नहीं बल्कि नसबंदी करने का तरीका था। लक्ष्य पूरा करने के लिए जहाँ से पुरुष मिल रहे हैं उन्हें उठाकर नसबंदी की जा रही हैं।  नसबंदी के ऑपरेशन में की गई लापरवाहियों से कइयों की जान गई हैं।
Shukranu


फ़िल्म में बताया जा रहा था कि नसबंदी पुरुषों पर बहुत बड़ा अत्याचार है, जो कि सरासर गलत है। नसबंदी गलत फ़ैसला नहीं बल्कि करने का तरीका गलत था।  जनसंख्या नियंत्रण करना कोई गलत योजना नहीं है और ज़रूरी है कि हर बार बच्चे न होने की प्रक्रिया के लिए महिला को ही गुजरना पड़े। बच्चा होने के लिए माता-पिता दोनों का बराबर हिस्सा होता हैं।

इतनी बुराई करने के बाद कहानी भी बता देते हैं। इंदर की शादी से पहले जबरदस्ती नसबंदी कर दी जाती है। उसे लगता है कि वह नपुंसक हो गया। डॉक्टर के समझाने के बाद उसे पता चलता है कि उसका वंश आगे नहीं बढ़ सकता बाकि वह नपुंसक नहीं हुआ है। कुछ दिनों बाद वह दिल्ली चला जाता है तब उसे पता चलता है कि उसकी पत्नी गर्भवती है। वह समझ जाता है कि यह बच्चा उसका नहीं है बल्कि उसकी पत्नी रीमा उससे बेवफाई कर रही है। वह इस कारण आकृति से अफेयर शुरू करता है। जब उससे शादी की बात आती है तब पता चलता है कि उसकी नसबंदी का ऑपरेशन नाकामयाब हो गया था। उसे एहसास होता है कि उसने अपनी पत्नी के साथ कितना गलत किया। इधर पत्नी और प्रेमिका के परिवार की मुलाक़ात हो जाती हैं तब सच सामने आता है।

फ़िल्म के जरिए क्या दिखाना चाह रहे थे, वह समझ नहीं आया। ऑपरेशन कई तरह के फ़ैल होते हैं, अगर फैल नसबंदी पर ही कोई फ़िल्म बनानी थी तो फ़िल्म में कुछ दूसरा मोड़ देना था।

अभिनय की बात करे तो इंदर (दिव्येंदु), रीमा (श्वेता) और दूसरे सभी कलाकारों ने अच्छा अभिनय किया। बैकग्राउंड संगीत भी अच्छा था।  डायरेक्शन, कैमरा और एडिटिंग की बात तभी की जा सकती है, जब कहानी में कोई दम हो।  हालाँकि नसबंदी पर फ़िल्म बहुत अच्छा कॉन्सेप्ट था, जिसे फ़िल्म लेखक ने बर्बाद कर दिया।


चलती का नाम गाड़ी: एक लड़की भीगी भागी सीhttps://filmistanbychandni.blogspot.com/2020/05/blog-post.html